आँखों की बाते कोई न जाने
कहती कुछ और है और बोलती कुछ और
लेकर अनोखी सी आँखों में आंसू
समझ में न आए खुशी है या गम
चारो तरफ है आंखे ही आंखे
सिर्फ देंखे उसे जिसे चाहती है आंखे
आँखों से ही यार मिला दे
आँखों से नैना चार करा दे
आँखों की बाते कोई न जानेजाने वही जिसे जाने ये आंखे
जाने वही जिसे जाने ये आंखे
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