हवाओं से अक्सर बुझ जाती है रोशनी ,
बुझती रोशनी को देखकर हम चिराग न जलाएं,
हो नहीं सकता..........
सहिलो पे जाकर अक्सर डूब जाती है कस्तियाँ,
डूबती कश्तियों को देखकर हम कस्ती न चलायें,
हो नहीं सकता ..........
जिन्दगी में मजबूरियां ही मजबूरियां है ,
इन मजबूरियों को देखकर हम जिन्दगी न जियें.
हो नहीं सकता.............
किसी की याद अक्सर रुला दिया करती है,
रोती आँखों को देखकर हम उनको याद न करें,
हो नहीं सकता.........
bhut hi achha likha hai tmne........ aise hi likhte rho........
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