निर्बल असहायों को असहाय मत समझो ,
रहते जो पे फुटपाथों पे फुटपाथ मत समझो,
सर्द की कड़कती ठण्ड में रहते जो फुटपाथों पे ,
बरसात के मौषम में रहते जो बरसातो में,
निर्बल असहायों को बरसात मत समझो,
दे नहीं सकते दो गज जमीं तो उनकी जमीर भी तो मत छीनो.........
हिंदुस्तान हमारा है कम से कम उनसे ये शब्द तो मत छीनो,
करके जो मजदूरी महल खड़ा कर देता है
नाम होता contractor का मजदूर भुला देते हो
कम से कम उन मजदूरों की मजदूरी तो मत छीनो ,
निर्बल असहायों को मजबूर मत समझो,
असहाय मत समझो ................
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