Friday, 19 August 2011

जाने वही जिसे चाहती है आंखे

आँखों की बाते कोई न जाने 
कहती कुछ और है और बोलती कुछ और
लेकर अनोखी सी आँखों में आंसू 
समझ में न आए खुशी है या  गम 
चारो तरफ है आंखे ही आंखे
सिर्फ देंखे उसे जिसे चाहती है आंखे
आँखों से ही यार मिला दे 
आँखों से नैना चार करा दे
आँखों की बाते कोई न जाने
जाने वही जिसे जाने ये आंखे
जाने वही जिसे जाने  ये  आंखे

Saturday, 6 August 2011

हो नहीं सकता

हवाओं से अक्सर बुझ जाती है रोशनी ,
बुझती रोशनी को देखकर हम चिराग न जलाएं,
हो नहीं सकता..........
सहिलो पे जाकर अक्सर डूब जाती है कस्तियाँ,
डूबती कश्तियों को देखकर हम कस्ती न चलायें,
हो नहीं सकता ..........
जिन्दगी में मजबूरियां ही मजबूरियां है ,
इन मजबूरियों को देखकर हम जिन्दगी न जियें.
हो नहीं सकता.............
किसी की याद अक्सर रुला दिया करती है,
रोती आँखों को देखकर हम उनको याद न  करें,
हो नहीं सकता.........  

Thursday, 4 August 2011

जिन्दगी भर की खुशियाँ

हर खुशियाँ  खुशी नहीं  देती.....
कुछ गम में भी बदल जाती है ..........
कुछ खुशियों पे ऐतबार किया करते हैं.....
वही जिन्दगी भर आँखों में नमी  दे जाती हैं
मत ले तू दो पल की खुशियाँ .....
जो बाद में गम में तब्दील हो जाये......
गम में ही जी ले दो पल अगर .....
जिन्दगी भर खुशियाँ दे जाये /
-
आशीष कुमार  गुप्ता